भोपाल: एक लाख एक पार्थिव शिवलिंग निर्माण के साथ-साथ प्रतिदिन रुद्राभिषेक कार्यक्रम का आयोजन

भोपाल: एक लाख एक पार्थिव शिवलिंग निर्माण के साथ-साथ प्रतिदिन रुद्राभिषेक कार्यक्रम का आयोजन

डिजिटल डेस्क, भोपाल। श्रावण मास के इस पावन महीने में पहला सावन सोमवार 10 जुलाई 2023 से 31 जुलाई 2023 में 100001 (एक लाख एक) पार्थिव शिवलिंग निर्माण का अति पुण्य कार्य किया जा रहा है, यहाँ प्रतिदिन पार्थिव शिवलिंग निर्माण के साथ-साथ भगवान भोलेनाथ का रुद्राभिषेक भी किया जा रहा है। इस अवसर पर 22 दिवसीय प्रतिदिन पार्थिव शिवलिंग निर्माण और रुद्राभिषेक कार्यक्रम का आयोजन मंशापूर्ण महादेव मंदिर धाम शिवा रॉयल पार्क फेज 2 के द्वार के पास सलैया भोपाल में कराया जा रहा है।

इस शुभ आयोजन के तहत 20 जुलाई गुरुवार को 50101 पार्थिव शिवलिंग निर्माण और रुद्राभिषेक कार्यक्रम किया गया। पार्थिव शिवलिंग निर्माण प्रतिदिन सुबह 6:00 से 9:00 बजे तक जारी रहता है, इसके बाद सुबह 9:00 से 10:00 बजे तक मंशापूर्ण महादेव का रुद्राभिषेक होता है। यह आयोजन आचार्य जितेंद्र शास्त्री जी महाराज शर्मा और पंडित नितेश शर्मा के सानिध्य में चल रहा है। श्रद्धालुओं से अनुरोध है की वो भी मंशापूर्ण महादेव मंदिर में आकर अधिक से अधिक संख्या में आकर इस पावन पुण्य कार्य में भाग ले कर अपने जीवन का उद्धार करें।

पार्थिव शिवलिंग की पूजा का महत्व

शिवपुराण के अनुसार सावन के महीने में पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में समस्त कष्ट दूर होकर सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने वाले शिवसाधक के जीवन से अकाल मृत्यु का भय दूर हो जाता है एवं भगवान शिव के आशीर्वाद से धन-धान्य, सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इनकी पूजा से अंत में मोक्ष को प्राप्त होता है। शिव महापुराण में दिए गए श्लोक "अप मृत्युहरं कालमृत्योश्चापि विनाशनम। सध:कलत्र-पुत्रादि-धन-धान्य प्रदं द्विजा:।"के अनुसार पार्थिव शिवलिंग की पूजा से तत्क्षण (तुरंत ही) जो कलत्र पुत्रादि यानी कि घर की पुत्रवधु होती है वो शिवशंभू की कृपा से घर में धन धान्य लेकर आती है। इनकी पूजा इस लोक में सभी मनोरथ को भी पूर्ण करती है। जो दम्पति संतान प्राप्ति के लिए कई वर्षों से तड़प रहे हैं, उन्हें पार्थिव लिंग का पूजन अवश्य करना चाहिए।

किसने किया पार्थिव पूजन

मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने लंका पर कूच करने से पहले भगवान शिव की पार्थिव पूजा की थी। मान्यता है कि कलयुग में भगवान शिव का पार्थिव पूजन कूष्माण्ड ऋषि के पुत्र मंडप ने किया था। जिसके बाद से अभी तक शिव कृपा बरसाने वाली पार्थिव पूजन की परंपरा चली आ रही है। शास्त्रों में वर्णित है कि शनिदेव ने अपने पिता सूर्यदेव से ज्यादा पराक्रम पाने के लिए काशी में पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजा की थी।

पार्थिव शिवलिंग की पूजा के लाभ

मान्यता है कि सावन के महीने में पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने पर व्यक्ति के जीवन से जुड़ी बड़ी से बड़ी बाधाएं दूर हो जाती हैं और कामनाएं पूरी होती हैं। पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने वाले शिव साधक के जीवन से अकाल मृत्यु का भय दूर हो जाता है। शिवपुराण के अनुसार पार्थिव पूजा करने वाले साधक को भगवान शिव के आशीर्वाद से धन-धान्य, सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है और वह सभी सुखों को भोगता हुआ अंत में मोक्ष को प्राप्त होता है।

Created On :   20 July 2023 6:13 PM GMT

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