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चैत्र मास: जानिए हिन्दू कैलेंडर के प्रथम माह के बारे में, ये है महत्व

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय नव वर्ष की शुरुआत चैत्र मास से ​होती है, जो 29 मार्च 2021 से शुरू हो चुका है। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक जब चंद्र ग्रह मेष राशि और अश्विनी नक्षत्र में प्रवेश करता है और 15वें दिन चित्रा नक्षत्र में पूर्ण हो जाता है तब चैत्र का महीना शुरू होता है। इस महीने में चित्रा नक्षत्र लगता है। वहीं यह भी कहा जाता है कि नया वर्ष प्रतिपदा से शुरू होता है,  नवरात्रि के साथ इस दिन गुड़ी पड़ा भी मनाया जाएगा और इसी दिन से विक्रम संवत 2078 आरंभ हो रहा है।

इस महीने वसंत ऋतु का अंत होता है और ग्रीष्म ऋतु आरंभ होती है। चैत्र के इस पवित्र मास का ज्योतिष शास्त्र से भी अत्यंत गहरा संबंध है। क्योंकि इस महीने से ही प्रकृति में शुभता और नई उर्जा का संचार होता है। आइए जानते हैं इस माह का महत्व और रखी जाने वाली सावधानियों के बारे में...

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महत्व
पौराणिक मान्यता अनुसार ब्रह्माजी ने चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही सृष्टि की रचना शुरू की थी। इसी दिन भगवान विष्णु ने दशावतार में से पहला मत्स्य अवतार लेकर प्रलयकाल में अथाह जलराशि में से मनु की नौका का सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया था। प्रलयकाल समाप्त होने पर मनु से ही नई सृष्टि की शुरुआत हुई।

इस महीने रखें ये सावधानियां
- इस महीने से धीरे-धीरे अनाज खाना कम करना चाहिए।
- पानी अधिक पीना चाहिए, फल खाएं।
- इस महीने में गुड़ नहीं खाना चाहिए।
- इस महीने में चना खाना बहुत अच्छा माना गया है। 
- इस महीने से बासी भोजन, खाना बंद कर देना चाहिए।

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- इस महीने में सूर्य और देवी की उपासना करना चाहिए। 
- नाम यश और पद प्रतिष्ठा के लिए सूर्य की उपासना करें।
- शक्ति और ऊर्जा के लिए देवी की उपासना करना चाहिए। 
- इस महीने में लाल फलों का दान करना चाहिए। 
- नियमित रूप में पेड़ पौधों में जल डालना चाहिए।