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संगीतकार राम-लक्ष्मण को लता मंगेशकर पुरस्कार, अब कला महाविद्यालयों में दिव्यांगों के लिए 5 फीसदी आरक्षण

डिजिटल डेस्क, मुंबई। ‘मैंने प्यार किया', ‘हम आपके हैं कौन' और ‘हम साथ-साथ हैं' जैसी सदाबहार फिल्मों को अपने संगीत से सजाने वाले संगीतकार विजय पाटिल उर्फ राम लक्ष्मण को इस साल का गायन सम्राज्ञी लता मंगेशकर पुरस्कार दिया जाएगा। राज्य सरकार की तरफ से दिया जाने वाला यह पुरस्कार उन्हें आगामी 29 अक्टूबर को रविंद्र नाट्य मंदिर में आयोजित एक समारोह में प्रदान किया जाएगा। राज्य सरकार के सांस्कृतिक कार्य निदेशालय की तरफ से हर साल गायन और संगीत के क्षेत्र में अनमोल योगदान देने वाले कलाकार को गायन सम्राज्ञी लता मंगेशकर पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। इस पुरस्कार के रूप में पांच लाख रुपए नकद, सम्मान चिन्ह प्रदान किया जाता है।

सांस्कृतिक कार्य मंत्री विनोद तावड़े की अध्यक्षता में समिति ने इस बार पुरस्कार के लिए संगीतकार विजय पाटिल उर्फ राम लक्ष्मण का चुनाव किया गया। इसके पहले यह पुरस्कार माणिक वर्मा, श्रीनिवास खले, गजानन वाटवे, दत्ता डावजेकर, पंडित जितेंद्र अभिषेकी, पंडित हदयनाथ मंगेशकर, ज्योत्सना भोले, आशा भोसले, अनिल विश्वास, सुधीर फडके, प्यारेलाल शर्मा, रवींद्र जैन, स्नेहल भाटकर, मन्ना डे, जयमाला शिलेदार, खय्याम, महेंद्र कपूर, सुमन कल्याणपुर, सुलोचना चव्हाण, यशवंत देव, आनंदजी शहा, अशोक पत्की, कृष्णा कल्ले, प्रभाकर जोग, उत्तम सिंह, पुष्पा पागधरे को प्रदान किया जा चुका है।

सांस्कृतिक कार्य मंत्री विनोद तावडे, मुंबई जिले के पालक मंत्री सुभाष देसाई, परिवहन मंत्री दिवाकर रावते, महापौर विश्वनाथ महाडेश्वर, सांसद राहुल शेवाले, विधायक सदा सरवणकर की उपस्थिति में राम लक्ष्मण को यह पुरस्कार पिछले साल की पुरस्कार प्राप्त वरिष्ठ गायिका पुष्णा पागधरे प्रदान करेंगी। 

कला महाविद्यालयों में दिव्यांग छात्रों के लिए 5 फीसदी आरक्षण
अब प्रदेश के सरकारी कला महाविद्यालय व गैर सरकारी अनुदानित संस्थाओं के सभी पाठ्यक्रमों में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए 5 प्रतिशत सीटें आरक्षित होंगी। इन संस्थाओं में प्रवेश के लिए उच्चतम आयु सीमा विकलांग विद्यार्थियों के लिए 5 वर्ष शिथिल की गई है। शुक्रवार को प्रदेश सरकार के उच्च व तकनीकी विभाग ने इस संबंध में शासनादेश जारी किया। इसके मुताबिक राज्य सरकार के कला निदेशालय के अधीन आने वाले सभी महाविद्यालयों के लिए यह फैसला लागू होगा। सरकार ने कला निदेशक को विभिन्न पाठ्यक्रमों के प्रवेश नियम में जरूरी संशोधन करने का निर्देश दिया है। विकलांग व्यक्ति अधिकार अधिनियम 2016 के प्रावधानों के तहत दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सीटें आरक्षित करने का फैसला किया गया है।

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वास्तु महागुरु बसंत आर रसिवासिया के रेवास्तु ऐप के जरिए आएगा जीवन में अद्भुत बदलाव! आम से खास लोग उठा सकेंगे इसका अलौकिक लाभ!

डिजिटल डेस्क, भोपाल । एक महागुरु जिन्होंने अपने ज्योतिष और वास्तु विद्या से लाखों लोगों की जिंदगी में बदलाव किया । जिन्होंने विज्ञान और आत्मज्ञान के बलबूते दुनिया जीत ली और अब वो तकनीकी जादू के जरिये अपने चाहनेवालों के जीवन में खुशियों का भंडार ला चुके हैं ।जी हां, महागुरु बसंत आर रसिवासिया अपने रिवाइवलवास्तु.कॉम और रेवास्तु ऐप के माध्यम से ज्योतिष विज्ञान अद्भुत क्रांति ला चुके हैं जिसका लाभ अब सबको लेना चाहिए।

 जी हां, महागुरु बसंत आर रसिवासिया कहते है कि,वास्तु के सिद्धांतों का उपयोग करना स्वास्थ्य, धन और ऊर्जा को बढ़ावा जैसा हैं जो पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश को वैज्ञानिक रूप से जोड़ते हैं और एक शांत कार्य वातावरण बनाते हैं जिससे जीवन मे समृद्धि आती हैं। 

बसंत आर रसिवासिया को उनकी सादगी के साथ-साथ उनकी सफलता और प्रभावशीलता के लिए जाना जाता है। उनका काम उनकी महारत को दर्शाता है क्योंकि बसंत आर रसिवासिया खुशी और समृद्धि के सदियों पुराने विज्ञान की बात करते हैं जो भगवान विश्वकर्मा से आता है कि कैसे जाति, पंथ की बाधाओं को पार करने वाली तकनीक का उपयोग करके वास्तु शास्त्र की ऊर्जा को जनता के बीच फैलाना प्रभावी है और सामाजिक स्थिति को मजबूत बनाना।

 बसंत आर रसिवासिया के ऐप "रेवास्तु" के माध्यम से, कोई भी अपने कमरे की एक तस्वीर क्लिक कर सकता है और मुख्य द्वार, लिविंग रूम, मास्टर बेडरूम, बच्चों के कमरे, अध्ययन, रसोई, मंदिर, सीढ़ी, शौचालय, लॉकर जैसी बुनियादी और सरल वास्तु आवश्यकताओं की जांच और सुधार कर सकता है साथ ही खुद मिरर और शू रैक प्लेसमेंट भी कर सकता हैं। 

बसंत आर रसिवासिया का जन्म असम के छोटे से शहर तिनसुकिया में एक कुलीन व्यवसायी परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता राधेश्याम अग्रवाल और लक्ष्मीदेवी अग्रवाल ने उन्हें निरुपरम हाई स्कूल में नामांकित किया, जिसे बेबी की नर्सरी के रूप में भी जाना जाता है, उसके बाद तिनसुकिया कॉलेज से उन्होंने डिग्री अर्जित की। अंतिम वर्ष में बसंत आर रसिवासिया मुंबई चले आये। 

1991 में, बसंत आर रसिवासिया ने अपने पिता के निर्माण व्यवसाय में मदद की। पांच साल बाद, उन्हें व्यापार में एक बड़ा नुकसान हुआ। बसंत आर रसिवासिया एक वास्तु सलाहकार से मिले, और विज्ञान से प्रभावित होकर, बसंत ने मास्टर्स से वास्तु और ज्योतिष सीखना शुरू किया। इसके बाद अंकशास्त्र आया, और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।

 सफलता की कहानी

 न्यूयॉर्क टाइम्स ने बसंत आर रसिवासिया के हवाले से एंटीलिया की दौलत पर एक स्टोरी की थी। बीबीसी ने वास्तु पर वृत्तचित्र पर बोलने के लिए बसंत आर रसिवासिया को चुना। 

विज्ञान का प्रचार 

बसंत आर रसिवासिया ने दुनिया भर में प्रत्येक भारतीय को वास्तव में घर पर अपने स्वयं के वास्तु की जांच करने में मदद करने के लिए रेवास्तु ऐप बनाया, जहां बुनियादी जरूरतों के लिए परामर्शदाता को शामिल किए बिना आम आदमी को वास्तु से लाभ ले सकता है। 

लोकोपकार

 बसंत आर रसिवासिया का मानना है कि ब्रह्मांड को उन लोगों को देने के लिए डिज़ाइन किया गया है जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। वह बालिकाओं को बचाने, अनाथों के सामूहिक विवाह, गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने, लावारिस शवों का पूरे सम्मान के साथ दाह संस्कार करने और दूसरों के बीच गरीबों के लिए मुफ्त वास्तु परामर्श, और वास्तु और ज्योतिष को दुनिया के सभी कोनों तक पहुंचाने की दिशा में काम करते है।

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आर एन टी यू, एन एस एस ने चलाया नशामुक्त भारत अभियान

डिजिटल डेस्क, भोपाल। विश्व एड्स दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय भोपाल द्वारा कुलसचिव डॉ विजय सिंह के निर्देशन में मिसरोद थाने के सहयोग से मिसरोद सड़क तथा जाटखेड़ी में नशामुक्त भारत अभियान चलाया गया। जिसमे मुख्य अतिथि थाना प्रभारी श्री रासबिहारी शर्मा उपस्थित रहे। श्री शर्मा ने कहा कि न केवल शहर में अपितु गांवों में भी युवाओं के बीच नशा करना एक फैशन बनता जा रहा है। जिससे युवा हमारे रियल युवा आदर्श स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों को भूलते जा रहे हैं और उनके दिखाए परहित व मानव सेवा के मार्ग से कटते जा रहे हैं। लेकिन राष्ट्रीय सेवा योजना के युवा नशे के खिलाफ अभियान चला रहे हैं यह प्रशंसा के योग्य है। युवा ही आज के समय में नशा मुक्ति अभियान में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। वहीं कार्यक्रम का नेतृत्व कर रही जन्नत खान के नेतृत्व में स्वयंसेवकों ने मिसरोद सड़क पर यात्रियों को नशे के नुकसान के बारे में बताया तथा जाटखड़ी जाकर ग्रामीणों को पोस्टर के माध्यम से नशा छोड़ने हेतु संदेश दिया। 

इसी के साथ संस्था स्तर पर पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का भी आयोजन नशामुक्त भारत तथा एड्स जागरुकता थीम पर किया गया। जिसमें विश्वविद्यालय के 50 से अधिक रासेयो स्वयंसेवकों ने सहभागिता करते हुए विभिन्न समसामयिक उदाहरणों कागज पर रंगों से उकेरकर नशे से दूर रहने तथा एड्स से बचाव करने का संदेश दिया। एड्स जागरुकता थीम पर पोस्टर में प्रथम स्थान नर्सिंग डिपार्टमेंट के छात्र व रासेयो स्वयंसेवक शशिनाथ व साक्षी ने संयुक्त रूप से प्राप्त किया। द्वितीय स्थान स्वयंसेविका शबनम कुमारी ने प्राप्त किया। 

इसी प्रकार नशा मुक्त भारत थीम पर पोस्टर मेकिंग में पल्लवी साहनी ने विशिष्ट स्थान अर्जित किया‌। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के डिप्टी रजिस्ट्रार डॉ समीर चौधरी ने राष्ट्रीय सेवा योजना के तहत आयोजित इस कार्यक्रम की भूरि भूरि प्रशंसा की तथा समाज में जागृति लाने में अपना योगदान देने के लिए सभी स्वयंसेवकों का आह्वान भी किया। श्री चौधरी ने कहा कि हम दुनिया की सबसे पुरा सभ्यता होते हुए भी सबसे युवा देश हैं। हमारे युवा दुनिया भर में भारत का नाम रोशन भी कर रहे हैं। परंतु नशे जैसी कुरीतियों में पड़कर युवा कमज़ोर हो रहे हैं अतः युवाओं को नशे से बाहर निकालकर उनकी ऊर्जा का उपयोग राष्ट्र निर्माण की दिशा में करना होगा। 

इस अवसर पर प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका निभा रहीं डॉ रुचि मिश्रा तिवारी व डॉ सावित्री सिंह परिहार ने प्रतिभागियों के संबोधित किया। संचालन स्वयंसेवक इंद्र डेहरिया तथा शिवेंद्र राजपूत ने तथा आभार ज्ञापन कार्यक्रम अधिकारी डॉ रेखा गुप्ता ने किया। कार्यक्रम का संयोजन कार्यक्रम अधिकारी गब्बर सिंह ने किया। कार्यक्रम में मुख्य भूमिका स्टेट कैंपर जन्नत खान, अविनाश कुमार, संदेश राजपूत, अमित कुमार, राजू कुमार, कोमल भारती, जिकरा खान, विवेक भास्कर, शाइस्ता परवीन, संस्कृति प्रसाद इत्यादि की रही‌।

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समूह संस्थानों से 637 प्रतिभागियों ने रन भोपाल रन की 5 किमी और 10 किमी दौड़ में लिया हिस्सा 

डिजिटल डेस्क, भोपाल। स्वस्थ जीवनशैली और स्वस्थ शरीर के प्रति जागरुकता फैलाने के अपने प्रयास के तहत रविवार को शहर में आयोजित रन भोपाल रन में आईसेक्ट समूह के संस्थानों की ओर से बड़े स्तर पर सहभागिता की गई। इसमें आईसेक्ट समूह के रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, सेक्ट प्रोफेशनल कॉलेज, स्कोप इंजीनियरिंग कॉलेज और आईसेक्ट हैड ऑफिस के स्टाफ और स्टूडेंट्स को मिलाकर 637 व्यक्तियों द्वारा हिस्सा लिया गया। इन्होंने 5 किमी और 10 किमी दौड़ में हिस्सा लेते हुए स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया। 

इस पहल पर बात करते हुए आईसेक्ट के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने कहा कि हम संस्थान में बेहतर जीवनशैली को अपनाने को लेकर अपने स्टाफ और छात्रों को लगातार जागरुक करते हैं जिससे वे अपने वर्क लाइफ बैलेंस में सामंजस्य रखना सीख सकें। यह छात्रों को लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भविष्य में वे भी प्रतिष्ठित संस्थानों का हिस्सा बनेंगे और उन्हें स्वस्थ जीवनचर्या उनके स्वास्थ्य के साथ ही उनके कार्य की उत्पादकता को भी बेहतर बनाएगी। साथ ही उन्होंने रन भोपाल रन की पहल की सराहना की और इसमें आईसेक्ट की सहभागिता की प्रशंसा की। आईसेक्ट समूह संस्थान से 637 लोगों द्वारा हिस्सा लिए जाने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए रन भोपाल रन की संयोजक अमिता बरबड़े ने कहा कि किसी एक संस्थान से इस स्तर पर सहभागिता एक उदाहरण पेश करता है और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरुकता के हमारे संदेश को लोगों तक पहुंचाने में आईसेक्ट ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके लिए उन्होंने आईसेक्ट की प्रशंसा की औऱ धन्यवाद दिया। 

रन भोपाल रन में आईसेक्ट समूह के संस्थानों की ओर से सहभागिता को सुनिश्यित करने के प्रयास में आरएनटीयू से ऋत्विक चौबे, रश्मि खन्ना, सेक्ट महाविद्यालय से डॉ. सतेन्द्र खरे, स्कोप इंजीनियरिंग कॉलेज से डॉ. डी.एस. राघव और आईसेक्ट हैड ऑफिस से कॉर्पोरेट एचआर टीम के सुमित मल्होत्रा, अभिषेक यादव और नीरज बेलसारे का सहयोग रहा।

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हैप्पो ने देश में 400 से अधिक घर प्रोजेक्ट्स पूरे किए

डिजिटल डेस्क, मुंबई।  ज्यादातर लोगों के लिए अपना घर होना, उनका सबसे बड़ा सपना होता है। यहां तक ​​कि जब उनके पास पर्याप्त पैसे होते हैं ,और उस स्तर पर पहुंच जाते हैं जहां वे अपने लिए एक अलग घर बना सकते हैं, तो भी घबराहट और संदेह महसूस करते हैं कि चीजें कैसी होंगी।

वे जिस तनाव से गुज़रते हैं, उसके पीछे एक प्रमुख कारण घर बनाने में शामिल जटिल प्रक्रियाएँ हैं |  ऐसे में एक कंपनी ने बिना किसी परेशानी या कठिनाई के लोगों के लिए अपना घर बनाना संभव कर दिया है।

भारत में लोगों के लिए 'हैप्पी होम्स' बनाने के सिद्धांत पर आधारित कंपनी हैप्पो घर बनाने के लिए वन-स्टॉप समाधान देने के आधार पर काम करती है। कंपनी ने 400 से अधिक घरों के प्रोजेक्ट्स  पर काम किया है और सफलतापूर्वक सभी घरों को तैयार  किया है| 

हैप्पो ने अब तक सभी विभिन्न आकारों और बजट के घर प्रोजेक्ट को पूरा करके बड़ी दक्षता दिखाई है। जब आप हैप्पो को चुनते हैं, तो आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि आपके घर के निर्माण से जुड़ी हर जिम्मेदारी का ख्याल रखा जा रहा है।आप ये सोच रहे होंगे कि इस क्षेत्र में हैप्पो को अन्य कंपनियों से अलग क्या करता है, इस बारे में विस्तार से बताते हुए, इसके सह-संस्थापक विनोद सिंह ने कहा, “ हम अलग तरीके से काम करते हैं , हम ग्राहक के सपनो के घर को प्रभावी तरीके वास्तविकता में निर्मित करने का काम करते हैं | 

हम यह सुनिश्चित करते हैं कि वे किसी भी संकट या असुविधा से न गुजरें जो निर्माण कार्य में शामिल हो , यह ग्राहक तय कर सकता है कि वह परियोजना से संबंधित दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों में किस हद तक शामिल होना चाहता है। हम ग्राहक द्वारा प्रदान किए गए संक्षिप्त विवरण के आधार पर परामर्श प्रदान करते हैं और फिर सब कुछ का विश्लेषण करने के बाद उन्हें अनुमान देते हैं। 

हम पारदर्शी मूल्य निर्धारण मॉडल पर काम करते हैं और लागत प्रभावी तरीके से काम करने के लिए जाने जाते हैं। एक प्रस्ताव को एक साथ रखते हुए, हम 2-d डिज़ाइन योजना तैयार करते हैं और यह सुनिश्चित करने के लिए 3-आयामी (3d) डिज़ाइन प्रस्तुत करते हैं कि ग्राहक को इस बारे में अच्छी जानकारी हो कि उनका घर कैसा आकार लेगा ।

यह डिज़ाइन और बिल्ड सॉल्यूशन , सरकारी परेशानियां से निजात के साथ हमारे ग्राहक के लिए इस जगह में वास्तव में एंड-टू-एंड समाधान प्रदान करता है” “एक बार प्रोजेक्ट को ग्राहक द्वारा स्वीकृति मिलने के बाद, हम इसके लिए स्पष्ट एवम परिभाषित योजना को  संचालित करने की दिशा में काम करना शुरू कर देते हैं। हम अपने विशेषज्ञों के माध्यम से नये प्रस्ताव लाते हैं और फिर, निर्माण परियोजना के उद्देश्य के लिए आवश्यक सरकारी संपर्क, परमिट और प्रमाणन प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू करते हैं। 

हमारी टीम में पेशेवर इंजीनियर और आर्किटेक्ट हैं जो यह सुनिश्चित करते हैं कि काम सुचारू रूप से चल रहा है और समय पर पूरा हो जायेगा हम यह सुनिश्चित करने के लिए कुछ निर्माताओं के साथ भी काम कर रहे हैं कि हमें सामग्री पर सर्वोत्तम मूल्य मिले और ग्राहकों को लाभ मिले”एक ही समय में कई ग्राहकों के साथ काम करने के बावजूद हैप्पो यह सुनिश्चित करता है कि ​​काम की गुणवत्ता में तो कोई समझौता नहीं किया जायेगा । हैप्पो द्वारा दिया जाने वाला हर निर्माण प्रोजेक्ट 5 साल की सर्विस वारंटी के साथ आता है। कंपनी अपनी कोर टीम की नींव पर टिकी हुई है जो अत्यधिक अनुभवी और कुशल है। जबकि हैप्पो का मुख्य कार्यालय पुणे में स्थित है, कंपनी ने भारत के विभिन्न शहरों और कस्बों में निर्माण परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा किया है।