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अमेरिका की राह पर यूरोप के 19 देश, जुआन ग्वाइदो को माना वेनेजुएला का अंतरिम राष्ट्रपति

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डिजिटल डेस्क, कराकस। वेनेजुएला में चल रहे राजनीतिक संकट के मामले में यूरोपियन यूनियन (EU), अमेरिका के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है। EU के 19 देशों ने वर्तमान राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाने और विपक्ष के नेता जुआन ग्वाइदो को अंतरिम राष्ट्रपति घोषित किया है। EU के इस मामले में एंट्री के साथ ही अबतक कुल 30 देशों ने ग्वाइदो को राष्ट्रपति बनाए जाने का समर्थन किया है। इससे पहले लैटिन अमेरिका के 11 देशों ने आन ग्वाइदो को अंतरिम राष्ट्रपति मानने के घोषणा पत्र पर साइन किए थे।

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने वर्तमान राष्ट्रपति मादुरो को राष्ट्रपति चुनाव करवाने के लिए कहा गया था। हालांकि वह ऐसा करने में नाकाम हुए। अमेरिका ने इसके बाद ग्वाइदो को वेनेजुएला का अंतरिम राष्ट्रपति घोषित किया था। इसपर लैटिन अमेरिका के 11 देश अमेरिका के समर्थन में खड़े हुए थे। इसमें होंडुरास, पनामा, पराग्वे, कनाडा, चिली, कोलंबिया, अर्जेंटिना, ब्राजील, कोस्टा रिका, ग्वाटेमाला और पेरू शामिल हैं। इसके साथ ही अमेरिका ने एक घोषणा पत्र भी जारी किया था। इसमें इन देशों ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि वह फोर्स का प्रयोग किए बिना सत्ता परिवर्तन में सहयोग करें।

लैटिन अमेरिकी देशों के बाद यूरोपियन यूनियन के 19 देशों ने भी इस घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए। इसमें लातविया, लिथुआनिया, एस्टोनिया, पोलैंड, स्वीडन, स्पेन, पुर्तगाल, जर्मनी, हंगरी, ऑस्ट्रिया, फिनलैंड, बेल्जियम, लक्समबर्ग, चेक रिपब्लिक, ब्रिटेन, डेनमार्क, हॉलैंड, फ्रांस और क्रोएशिया जैसे देश शामिल हैं। हालांकि इटली समेत EU के नौ देशों ने इस घोषणा पत्र पर साइन नहीं किए। इस घोषणा पत्र में ग्वाइदो को राष्ट्रपति घोषित करने के अलावा सभी देशों से वेनेजुएला से किसी भी प्रकार का संबंध नहीं रखने का अनुरोध किया गया है। इसके साथ ही वेनेजुएला में लोकतांत्रिक राष्ट्रपति चुनाव कराने का भी आह्वान किया गया है।

बता दें कि वेनेजुएला में इन दिनों राष्ट्रपति मादुरो के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। अमेरिका ने भी इस विवाद में कुदते हुए वेनेजुएला पर प्रतिबंध लगाने की धमकी दी थी। इसके बाद मादुरो ने अमेरिका से रिश्ते खत्म करन का ऐलान कर दिया था। यहां तक कि मादुरो सरकार ने अमेरिकी राजनयिकों को 72 घंटों के अंदर वेनेजुएला छोड़ने का आदेश दे डाला था। इसके बाद अमेरिका ने वेनेजुएला की तेल कंपनी PDVSA पर प्रतिबंध लगा दिया। इस विरोध प्रदर्शन में कई लोग अपनी जान भी गंवा चुके हैं।