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Study: क्या आप भी वीकेंड पर सोकर करते हैं अधूरी नींद पूरी? तो जान लें ये बात

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जिंदगी की भागदौड़ और काम के तनाव के चलते कई बार नींद पूरी नहीं हो पाती। हफ्तेभर तक लोग वीकेंड का इंतजार करते हैं, ताकि एक दो घंटे एक्स्ट्रा सो सके और हफ्ते भर की अधूरी नींद पूरी हो सके। वीकेंड के एक दिन पहले ही सारे अलार्म बंद कर दिए जाते हैं, जिससे किसी भी तरह का डिस्टर्बेंस पैदा न हो। आपको लगता होगा कि हफ्ते में एक दिन ज्यादा सोने से नींद की समस्या नहीं होगी और शायद आप फिट रहेंगे। आपको बता दें कि एक स्टडी के अनुसार ये साफ कर दिया गया है कि ऐसा करने से कोई खास फायदा नहीं होता। 

हालही में अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो बोल्डर में की गई रिसर्च के अनुसार बताया गया है कि हफ्ते भर की नींद की भरपाई सिर्फ एक दिन सोकर कर लेने से कोई खास फायदा नहीं होता। इससे उल्टा आपको नुकसान ही होता है। 
 
इस शोध में खास भूमिका निभाने वाले केनेथ राइट का कहना था कि 'हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि हफ्ते भर पूरी नींद न लेना और वीकेंड पर सोकर इसकी भरपाई की रणनीति कुछ खास प्रभावी नहीं है। ऐसा करने से शरीर थोड़ा तो रिकवर होता है लेकिन यह असर ज्‍यादा समय तक नहीं रहता।' 

यह शोध 36 लोगों पर किया था। इन सबकी उम्र लगभग 18 से 39 साल थी। जिसमें सबके सोने और काम करने का अलग-अलग टाइम शेड्यूल फिक्स किया गया। इनके खाने, सोने पर खास नजर रखी गई। बेसिक टेस्टिंग के बाद इन सभी को तीन ग्रुप में बांटा गया। एक ग्रुप वह था, जिसे नौ घंटे सोने की इजाजत दी गई। दूसरे ग्रुप को पांच घंटे सोने की इजाजत दी गई। यह दोनों ही ग्रुप वीकेंड पर जितना चाहें सो सकते थे। तीसरे ग्रुप को रोजाना पांच घंटे सोने की परमिशन दी गई, लेकिन वीकएंड पर तीसरे ग्रुप को ज्यादा सोने की इजाज़त नहीं दी गई। 

वे समूह जिन्हें वीकेंड पर भरपूर नींद नहीं लेने दी गई। उन्होंने रात को सोने से पहले कुछ न कुछ खाया और वजन में बढ़ोत्तरी हो गई। अध्‍ययन के दौरान उनके शरीर में इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता में कमी पाई गई। वहीं जिन लोगों को वीकेंड में भरपूर नींद लेने की प​रमिशन दी गई। उन लोगों में मामूली तौर पर सुधार देखा गया, लेकिन अपने डेली रूटीन में वापस आते ही सुधार गायब हो गया।  क्रिस डिपनर जो इस​ रिसर्च के प्रमुख थे, उनके अनुसार 'स्‍टडी के आखिर में हमने देखा कि जिन लोगों ने वीकेंड पर नींद पूरी करने की कोशिश की उनकी मेटाबॉलिक गतिविधियों में कोई लाभदायक सुधार नहीं हुआ।' इस रिपोर्ट को जर्नल ऑफ करंट बायॉलजी में पब्लिश किया गया था।