पुलवामा अटैक देश विदेश कुंभ 2019 मुख्य शहर राज्य राशिफल मनोरंजन बिज़नेस Gadgets ऑटोमोबाइल लाइफस्टाइल स्पोर्ट्स धर्म अजब गजब वीडियो फोटोज रेसिपी ई-पेपर
2.7k
0
0

करतारपुर के बाद अब PoK के शारदा पीठ तीर्थ को खुलवाने की मांग, महबूबा ने लिखा पत्र

Highlights

डिजिटल डेस्क, श्रीनगर। पाकिस्तान के करतारपुर स्थित सिखों के धार्मिक स्थल गुरुद्वारा दरबार साहिब के लिए करतारपुर कॉरिडोर का शिलान्यास होने के बाद अब PoK में स्थित शारदा पीठ के लिए रास्ता खुलवाने की मांग होने लगी है। पीडीपी नेता और जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने यह मांग की है। उन्होंने इसके लिए पीएम मोदी को एक पत्र भी लिखा है।

बता दें कि शारदा पीठ तीर्थ पाक अधिकृत कश्मीर क्षेत्र में आता है। कश्मीरी पंडितों के लिए यह एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। पाकिस्तान द्वारा कश्मीर पर कब्जा करने से पहले बड़ी संख्या में हिंदू तीर्थयात्री इस धार्मिक स्थल पर दर्शन करने आते थे, लेकिन कश्मीर के कुछ हिस्से पर पाक के अधिग्रहण के बाद भारत के हिंदू तीर्थयात्रियों के लिए यहां जाना नामुमकिन ही रहा। अब महबूबा ने कश्मीरी पंडितों के हित में केन्द्र सरकार से इस मामले में कदम उठाने की मांग की है, जो कश्मीरी पंडितों के लिए एक बड़ी सौगात के रूप में देखा जा रहा है।

महबूबा मुफ्ती ने पीएम मोदी के नाम अपने पत्र में लिखा है, 'भारत-पाक के बीच करतारपुर कॉरिडोर खोलने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। इस कदम से सिख तीर्थयात्री पड़ोसी देश में स्थित अपने धर्म स्थल पर जा सकेंगे। मैं उम्मीद करती हूं कि केन्द्र सरकार का यह कदम दोनों देशों के बीच रिश्तों की नई इबारत लिखेगा और क्षेत्र में शांति और समृद्धि आएगी।'

महबूबा लिखती हैं, 'हमारी पार्टी हमेशा से दोनों देशों के लोगों का एक-दूसरे देश में आने-जाने का समर्थन करती रही है। हम चाहते हैं कि जिस तरह सिखों के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। उसी तरह कश्मीरी पंडितों के लिए भी कुछ करे।' उन्होंने लिखा, 'PoK में स्थित शारदा पीठ कश्मीरी पंडितों के लिए एक बड़ा तीर्थस्थल है। श्रीनगर-मुजफ्फराबाद रोड के खुलने के बाद से ही राज्य की जनता इस पीठ के लिए रास्ता खोलने की मांग करती रही है। सिखों के लिए करतारपुर कॉरिडोर खोलने के बाद से राज्य की हिंदू आबादी आशान्वित है कि केन्द्र सरकार शारदा पीठ का रास्ता खोलने के लिए पाकिस्तान से बात करेगी।'

महबूबा ने यह भी लिखा कि इस तरह के कूटनीतिक रास्तों से भारत-पाक के बीच शांति स्थापित हो सकेगी। इससे कश्मीर को भी हिंसा और विध्वंस से बाहर निकालने में मदद मिलेगी।