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इन राज्यों में होती है रंगपंचमी की धूम, जानें रंगपंचमी का महत्व

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। रंगपंचमी होली के पांच दिन बाद मनाई जाती है। इस बार होली 21 मार्च 2019 को है और रंगपंचमी 25 मार्च 2019 को मनाई जाएगी। यह महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। साथ ही यह पर्व गुजरात और मध्य प्रदेश के साथ देश के कुछ और हिस्सों में बिहार, धनबाद, हिमाचल और उत्तराखंड के कई हिस्सों में रंग पंचमी का यह त्यौहार मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन वातावरण में उड़ते हुए गुलाल व्यक्ति के सात्विक गुणों में अभिवृद्धि करते हैं और उसके तामसिक और राजसिक गुणों का नाश होता है। मध्यप्रदेश में रंग पंचमी खेलने की परंपरा काफी पुरानी है। यहां लोग इस दिन जुलूस निकालते है। वहीं पूरी-श्रीखंड का मजा लेते है।

क्या है इसका महत्व
रंगपंचमी के दिन कई स्थानों पर एक-दूसरे के शरीर पर रंग व गुलाल डालकर यह पर्व मनाया जाता है। दरअसल इस दिन यह मान्यता है कि रंगों के गुलाल से वातावरण में ऐसी स्थिति व्याप्त होती है जिससे तमोगुण और रजोगुण का नास होता है। इस दिन खेली जाने वाली रंगपंचमी, विजयोत्सव का अर्थात रज-तम के विघटन से अनिष्ट शक्तियों के उच्चाटन व कार्य की समाप्ति का प्रतीक है। इस दिन वायुमंडल में उड़ाए जाने वाले विभिन्न रंगों के रंग कणों की ओर विभिन्न देवताओं के तत्व आकर्षित होते हैं। ब्रह्मांड में कार्यरत सकारात्मक तरंगों के संयोग से होकर जीव को देवता के स्पर्श की अनुभूति देकर देवता के तत्व का लाभ मिलता है।

महाराष्ट्र में रंग पंचमी के दिन मछुआरों की बस्ती में नाच-गाना होता है। यह मौसम शादी तय करने के लिए भी ठीक माना जाता है, क्योंकि सारे मछुआरे इस त्योहार पर एक-दूसरे के घर पर मिलने जाते हैं और काफी मस्ती करते हैं। कानपुर में ठीक इसके उलट होता है। होली दहन के बाद से कानपुर में धुलेंड़ी से रंग खेलने का जो सिलसिला शुरू होता है, वह करीब एक हफ्ते तक चलता है।