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शीला बोलीं- मनमोहन आतंक से निपटने में मोदी की तरह मजबूत नहीं थे

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली कांग्रेस चीफ और पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने गुरुवार को एक बड़ा बयान दिया है। शीला दीक्षित ने स्वीकार किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आतंकवाद से निपटने में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से ज्यादा सख्त हैं। शीला ने कहा कि पीएम मोदी ने आतंक के खिलाफ काफी सूझबूझ से लड़ा, लेकिन वह इसका इस्तेमाल अपनी राजनीति चमकाने के लिए कर रहे हैं। इस बयान से कांग्रेस पार्टी में भूचाल मचने के बाद शीला ने इस बयान से किनारा भी कर लिया। शीला ने एक ट्वीट के जरिए सफाई पेश की और लिखा कि मेरे बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। 

शीला से एक इंटरव्यू में पूछा गया कि पीएम मोदी बार-बार कांग्रेस पर आरोप लगा रहे हैं। पीएम मोदी का कहना है कि यूपीए सरकार ने 2008 में आतंकी हमले के बाद कुछ नहीं किया। जबकि पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने एयरस्ट्राइक करते हुए आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को तहस-नहस कर दिया। इसके जवाब में शीला ने कहा, 'मैं आपसे सहमत हूं कि मनमोहन सिंह उतने मजबूत और दृढ़ नहीं थे, जितना कि पीएम मोदी हैं। हालांकि मेरे अंदर एक भावना यह भी है कि पीएम मोदी यह सब राजनीति के लिए कर रहे हैं।' 

राजनीतिक गलियारों में शीला दीक्षित के इस बयान ने हलचल मचा दी है। इसके कुछ ही देर बाद शीला ने एक ट्वीट करते हुए मीडिया पर बयान को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया। शीला ने सफाई पेश करते हुए लिखा, 'मैंने जो कहा उसका गलत मतलब निकाला गया। मैंने यह कहा था कि कुछ लोग सोचते हैं पीएम मोदी काफी सख्त हैं, लेकिन मुझे लगता है कि यह केवल एक चुनावी नौटंकी है और कुछ नहीं। मैंने यह भी कहा इंदिरा गांधी आतंक के खिलाफ काफी सख्त थीं।' 

बता दें कि पूलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने पाक स्थित बालाकोट में एयर स्ट्राइक किया था। इस एयरस्ट्राइक में 12 मीराज विमानों द्वारा जैश के ठिकानों पर 1000 किग्रा से भी अधिक बम गिराए गए थे। उस वक्त मीडिया रिपोर्ट्स में 300 से भी अधिक आंतकियों के मारे जाने का दावा किया गया था। 

इसके बाद से पीएम मोदी लगातार कांग्रेस को घेरते रहे हैं। पीएम मोदी ने एक रैली में यूपीए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि 2008 में मुंबई आतंकी हमले के बाद पाक को करारा जवाब देने की जरूरत थी, लेकिन मनमोहन सिंह की सरकार ने कोई भी सैन्य कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया। इस हमले में करीब 166 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं हमारी सरकार ने उरी और पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक किया और आतंकियों का सफाया कर दिया।