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महाशिवरात्रि के पर्व पर अर्ध कुम्भ का समापन, संगम के घाटों पर श्रद्धालुओं का जमघट

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रयागराज में चल रहे अर्ध कुम्भ का समापन आज महाशिवरात्रि के पावन दिन होने जा रहा है। इस दिन गंगा स्नान करके शिव की अराधना करने वाले लोगों को विशेष कृपा प्राप्त होती है। ऐसे में संगम के घाटों पर श्रद्धालुओं का जमघट लगा हुआ है। अर्धरात्रि से ही यहां भक्तों का हुजूम उमड़ता दिखाई दे रहा है। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को पड़ने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। वहीं सोमवार के दिन महाशिवरिात्र का पर्व होने से इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है। आपको बता दें कि दुनिया का सबसे बड़ा आयोजन कहा जाने वाला कुंभ मेले का समापन आज पूरे 49 दिनों के बाद हो रहा है। ऐसे में यहां एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। 

स्नान का महत्व
कुंभ मेले में मुख्य स्नान का महत्व विशेष होता है। इस दिन गंगा स्नान करना काफी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन कुम्भ में स्नान करने से व्यक्ति के रोग-विकार, पाप आदि का नाश होता है। साथ ही यह भी माना जाता है कि महाशिवरात्रि पर मुख्य स्नान से गंगा में डुबकी लगाने से अमरत्व प्राप्त होता है। इसी कारण है कि साधु-संत बड़ी संख्या में स्नान करने आते हैं।

समन्वय का संदेश
इस बार प्रयागराज में दुनिया का सबसे बड़ा तंबुओं का अस्थायी नगर बस गया था। इस अंतिम विदाई और विशेष स्नान में विभिन्न अखाड़ों से संबंध रखने वाले साधु-संत सोने-चांदी की पालकियों, हाथी-घोड़े पर बैठकर संगम में स्नान के लिए पहुचेंगे। ये साधु-संत अपनी-अपनी शक्ति और वैभव का प्रदर्शन करते हैं जिसके जरिए शस्त्र और शास्त्र के समन्वय का संदेश देते हैं। शरीर पर राख लिपटी रहती है और वे जयकारा भी लगाते रहते हैं।

ब्रह्माण्ड का उद्गम
माना जाता है कि प्रयागराज में जहां पर कुंभ मेले का आयोजन होता है वहीं ब्रह्माण्ड का उद्गम हुआ था और वहीं पर पृथ्वी का केंद्र भी है। मान्यता ये भी है कि सृष्टि निर्माण से पहले ब्रह्माजी ने इसी स्थान पर अश्वमेघ यज्ञ भी किया था। इस बार कुम्भ मेला क्षेत्र करीब 45 वर्ग किमी के दायरे में फैला था जबकि इससे पहले यह सिर्फ 20 वर्ग किमी इलाके में ही होता रहा था।

अमरता का वरदान
इस मुख्य स्नान को राजयोग स्नान भी कहा जाता है, जिसमें साधु-संत और उनके अनुयायी संगम में तय समय पर डुबकी लगाते हैं माना जाता है कि शुभ मुहूर्त में डुबकी लगाने से अमरता का वरदान मिल जाता है। इस दिन डुबकी लगाने एक करोड़ से अधिक लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। आपको बता दें कि सम्पूर्ण भारत में कुल चार स्थानों पर कुंभ का आयोजन होता है – 1- प्रयागराज, 2- हरिद्वार, 3- उज्जैन और 4- नासिक। इनमें से दो स्थानों पर बारहवें साल कुंभ होता है, लेकिन प्रयागराज और हरिद्वार में दो कुंभ पर्वों के बीच में छह वर्ष के अंतराल पर अर्धकुंभ का आयोजन होता है।