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Twitter CEO को मिला 15 दिन का समय, संसदीय समिति ने पारित किया प्रस्ताव

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। संसदीय समिति ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया है कि वे ट्विटर के किसी भी अधिकारी से तब तक नहीं मिलेंगे जब तक कि समिति के समक्ष वरिष्ठ सदस्य या ट्विटर ग्लोबल टीम के सीईओ पेश न हो। इसके लिए ट्विटर को 15 दिन का समय दिया गया है। 

दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा के मुद्दे को लेकर सोमवार को भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में ट्विटर के CEO और शीर्ष अधिकारियों को शामिल होने के लिए समन जारी किया गया था। ये बैठक पहले 7 फरवरी को होनी थी, लेकिन ट्विटर के सीईओ और वरिष्ठ अधिकारियों के बैठक में शामिल होने से इनकार के बाद इसे 11 फरवरी तक स्थगित कर दिया गया था।

सोमवार को बैठक में शामिल होने के लिए ट्विटर की टीम पहुंची लेकिन इस टीम में CEO शामिल नहीं थे। ऐसे में संसदीय समिति ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर साफ तौर पर कह दिया कि जब तक ट्विटर के CEO भारत नहीं आएंगे तब तक वह किसी भी अधिकारी से मुलाकात नहीं करेंगे। इससे पहले, शनिवार को ट्विटर ने एक बयान जारी कर पुष्टि की थी कि संसदीय समिति के आरोपों का जवाब देने के लिए ट्विटर समय पर अमेरिका में अपने मुख्यालय से वरिष्ठ अधिकारियों को भेजने में असमर्थ होगा।

सैन फ्रांसिस्को स्थित कंपनी ने कहा था कि हम मिलने से इनकार नहीं कर रहे हैं, बल्कि यह कह रहे हैं कि दोनों पक्षों की सहमति से तारीख तय की जाए, ताकि इस मीटिंग में दोनो पक्ष शामिल हो सकें। हमने ट्विटर इंडिया के प्रतिनिधियों को भी आने और जवाब देने की पेशकश की है। हम इन दोनों मामलों पर सरकार से प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

इससे पहले 7 फरवरी को ट्विटर CEO के मीटिंग में शामिल नहीं होने पर कंपनी की तरफ से कहा गया था कि उन्हें पेश होने के लिए बेहद शॉर्ट पीरियड का नोटिस दिया गया है इसीलिए उन्हें अभी और समय चाहिए। एक फरवरी को संसदीय आईटी समिति के ट्विटर को भेजे गए पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि 'यह ध्यान दिया जाए कि संगठन के प्रमुख को समिति के समक्ष उपस्थित होना है'। 

इस मामले को लेकर ट्विटर की कानूनी, नीतिगत, विश्वास और सुरक्षा विभाग की ग्लोबल हेड विजया गड्डे ने संसदीय समिति को एक एक पत्र लिखा था। पत्र में कहका गया था की 'ट्विटर इंडिया के लिए काम करने वाला कोई भी व्यक्ति भारत में कंटेंट और अकाउंट से जुड़े हमारे नियमों के संबंध में कोई प्रभावी फैसला नहीं करता है।