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लता मंगेशकर जैसी दिव्य आवाज नहीं मिल सकती : उषा मंगेशकर

डिजिटल डेस्क, नागपुर। आज का समय संगीत की दृष्टि से अच्छा नहीं है। आजकल हर गाने का रिमिक्स हो जाता है, जो ठीक नहीं है। यह बात गायिका उषा मंगेशकर ने विष्णु जी की रसोई में आयोजित पत्रकारवार्ता में कही। उन्होंने कहा कि लता मंगेशकर जैसी दिव्य आवाज हमें नहीं मिल सकती। सखी सोबती फाउंडेशन और हार्मोनी इवेंट्स के संयुक्त तत्वावधान में ‘त्रिवेणी’ कार्यक्रम का आयोजन शुक्रवार की शाम 7 बजे से सुरेश भ‌ट सभागृह में किया गया है। कार्यक्रम की संकल्पना हार्मोनी इवेंट्स के राजेश समर्थ की है।

कार्यक्रम में उषा मंगेशकर द्वारा लगभग 7 से 8 गानों की प्रस्तुति दी जाएगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता महापौर नंदा जिचकार करेंगी। विशेष अतिथि गिरीश गांधी होंगे। कार्यक्रम में महापौर द्वारा उषा मंगेशकर का सत्कार भी किया जाएगा। शहर के सागर मधुमटके, ज्योतिर्रमन अय्यर, आकांक्षा नगरकर, मुकुल पांडे, गौरी शिंदे गायकवाड़, पल्लवी दामले, पलक आर्य तथा मनीषा निश्चल कलाकार आदि गाने की प्रस्तुतियां देंगे। संचालन श्वेता शैलगांवकर द्वारा किया जाएगा। पत्रकार वार्ता में विजय जथे, प्रफुल्ल मनोहर, रवि अंधारे, मिलिंद देशकर उपस्थित रहेंगे।

नया नागपुर देखने को मिला
उषा मंगेशकर ने कहा कि मुझे वर्षों बाद नागपुर आने का अवसर मिला है। मुझे नया नागपुर देखने को मिला है। उन्होंने अपने समय के संगीत के बारे में चर्चा हुए कहा कि हमारे समय एक गाने की रिकार्डिंग करने में लगभग 15-20 दिन लगते थे, उसके बाद गाना सेट पर जाता था, जिससे सिंगर्स को गाना याद हो जाता था। गाना कौन सा गायक गाएगा, किसकी आवाज गाने में सूट करेगी इन सब के लिए म्यूजिक डायरेक्टर चर्चा करते थे। अब समय बहुत बदल गया है। आज का समय बहुत अलग है। सिंगर्स को खुद ही अपने गाने की एक लाइन से ज्यादा याद नहीं रहता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में उन्हें शंकर महादेवन और श्रेया घोषाल की गायकी पसंद है।

चित्रकला, गायकी का गहरा संबंध
उषा मंगेशकर से उनकी पेंटिंग पर चर्चा की गई, तो उन्होंने कहा कि मैं अपनी मां को पेंटिंग करते हुए देखकर पेंटिंग करना सीखी हूं। चित्रकला और गायकी में गहरा संबंध है। मैं घर पर बैठकर ही पोर्टेट बनाती हूं। मेरी सबसे यादगार पेंटिंग शिवाजी गणेशन की पेंटिंग थी। मैंने शिवाजी गणेशन का पोर्टेट 1 घंटे में वॉटर कलर से बनाया था। जब मैंने उनको वो गिफ्ट किया, तो वे बहुत खुश हुए। उनके इस पोर्टेट को देखकर उनके जर्मन से आए डेलिगेट्स ने भी तारीफ की। उन्होंने अपने जीवन का सबसे दु:खदायी क्षण उपनी मां की मृत्यु को बताया, साथ ही जीवन का मोस्ट मेमोरेबल पल लता मंगेशकर को भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित करना बताया। जब उनसे राजनीति के संबंध में सवाल पूछा गया कि क्या कलाकारों को राजनीतिक पक्ष लेना चाहिए, तो उन्होंने कहा कि चाहे कलाकार या कोई भी हो, जो योग्य है उनका साथ देना चाहिए।