माइक्रो मैनेजमेंट से मैनपुरी का किला ढहाने की फिराक में भाजपा

BJP trying to demolish Mainpuri fort with micro management
माइक्रो मैनेजमेंट से मैनपुरी का किला ढहाने की फिराक में भाजपा
मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव माइक्रो मैनेजमेंट से मैनपुरी का किला ढहाने की फिराक में भाजपा

डिजिटल डेस्क, मैनपुरी। मैनपुरी सीट पर हो रहे लोकसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने पूरी ताकत झोंक रखी है। भाजपा ने जहां एक ओर प्रचार को धार दे रखी है, वहीं दूसरी तरफ माइक्रो मैनेजमेंट के जरिए विरोधी को उसी के गढ़ में मात देने की फिराक में हैं।

मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद मैनपुरी में लोकसभा का उपचुनाव हो रहा है। इसमें सपा की ओर से डिंपल यादव प्रत्याशी हैं तो भाजपा ने पूर्व सांसद रघुराज सिंह शाक्य को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं बसपा और कांग्रेस ने प्रत्याशी उतारने से हाथ खड़े कर दिए हैं। ऐसे में मुख्य मुकाबला सपा और भाजपा के बीच ही माना जा रहा है।

राजनीति पर नजर रखने वाले बताते हैं कि चुनाव की घोषणा होने के बाद से भाजपा ने वहां जमीनी स्तर पर जाल बुनना शुरू कर दिया दिया। जातिगत समीकरण को भांपते हुए उसने वर्ग बहुलता वाले नेता की ड्यूटी लगा रखी है। चुनाव की गंभीरता को समझते हुए संगठन के महामंत्री धर्मपाल भी कई स्तर की बैठक कर चुके हैं। धर्मपाल ने गोला उपचुनाव में मिली जीत का फार्मूला भी कार्यकर्ताओ को समझाया, साथ ही उन्होंने बूथ लेवल और शक्ति केंद्र की सक्रियता को और तेज करने के निर्देश दिए। इसके अलावा उन्होंने मंडल अध्यक्ष, प्रभारी, शक्ति केंद्रों के संयोजकों को मतदाता सतत संपर्क रखने और संवाद करने के निर्देश दिए हैं।

भाजपा के एक कार्यकर्ता ने बताया कि मैनपुरी लोकसभा सीट को भाजपा हर हाल में जीतना चाहती है। इसके लिए उसने छोटे से बड़े हर कार्यकर्ता को अपने अपने स्तर से जिम्मेदारी दे रखी है। उन्होंने बताया कि बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओं को कम से कम तीन बार मतदाता के घर जाना है। वोटर लिस्ट में दर्ज मतदाता को पार्टी के पक्ष में वोट डलवाने को पन्ना प्रमुखों को सक्रिय किया गया है। चाचा भतीजे की एक होने की परिस्थिति को देखते हुए भाजपा ने भी अपनी रणनीति बदली है। इसके साथ ही मतदाताओं की तादात के हिसाब से जनसभाओं को लगाया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर दोनों उपमुख्यमंत्री भी भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास करेंगे। यहां पर यादव के अलावा शाक्य वोटर की संख्या ठीक ठाक है उसके लिए केशव मौर्या को हो सकता है एक दो दिन ज्यादा मैदान में उतारा जाए।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक प्रसून पांडेय कहते हैं कि मैनपुरी सीट पर भाजपा आज तक कभी कमल खिलाने में कामयाब नही हो सकी है। मुलायम के तिलिस्म के आगे एक के बाद एक प्रत्याशी ढेर होते रहे। इस बार मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद भाजपा मैनपुरी सीट पर कमल खिलाने के लिए बेताब है। इसके लिए भाजपा ने अपने रथ का सारथी रघुराज सिंह शाक्य को बनाया है। उधर सपा ने मुलायम की बहू डिंपल को मैदान में उतारा है। अब लड़ाई सहनभूति बनाम सामाजिक समीकरण की हो गई है। लेकिन भाजपा को जातिगत समीकरण से उम्मीदें बहुत लगा ली। उसे लगता है कि माइक्रो मैनेजमेंट की बदौलत उसे मैनपुरी में जीत मिल सकती है। इस कारण सरकार और संगठन ने मिलकर ताकत झोंक रखी है। प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल ने चुनाव में पैनी नजर गड़ा रखी है। भाजपा को लगता है मैनपुरी के नतीजे उनके पक्ष में आते हैं तो लोकसभा चुनाव में उन्हें बहुत आसानी हो जाएगी।

 

 (आईएएनएस)

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Created On :   23 Nov 2022 7:00 AM GMT

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